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Mahendra Singh Dhoni Biography:-यह रास्ता है एक टिकट कलेक्टर की जो इंडियन रेलवेज के वेस्ट बंगाल के खड़कपुर इलाके में टिकट कलेक्टर हुआ करता था आगे जाकर ये बना भारत का सफलतम कप्तान महेंद्र सिंह धोनी |

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महेंद्र सिंह धोनी परिचय (Mahendra Singh Dhoni Biography- introduction)

Mahendra Singh Dhoni Biography

पूरा नाम: महेंद्र सिंह धोनी

जन्म : 7 जुलाई 1981 रांची, बिहार ( झारखंड)

उपनाम: माही, कैप्टन कूल, थाला

हाइट: 5 फीट 10 इंच (1.78 मीटर)

बल्लेबाजी: दाएं हाथ से

बॉलिंग: राइट-आर्म मीडियम

रोल: विकेट कीपर बल्लेबाज

वाइफ: साक्षी धोनी

बेटी: जीवा

रिटायरमेंट डेट :-15 अगस्त 2020

Mahendra Singh Dhoni Biography

Mahendra Singh Dhoni Career statistics- महेंद्र सिंह धोनी का कैरियर रिकॉर्ड 

कंपटीशन टेस्ट ओडीआई T20
मैच 90 350 98
रन स्कोर 4,876 10,773 1,617
बैटिंग एवरेज 38.09 50.53 37.60
100s/50s 6/33 10/73 0/2
टॉप स्कोर  224 183* 56
Balls Bowled  96 36
विकेट 0 1
बॉलिंग एवरेज 31.00
कैच/स्टंपिंग 256/38 321/123 57/34

 

Mahendra Singh Dhoni Biography In Hindi- हिंदी में 

Mahendra Singh Dhoni Biography

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई सन 1981 में हुआ जगह थी बिहार का रांची जिला का जो अब झारखंड में है| महेंद्र सिंह धोनी दरअसल एक राजपूत परिवार से ताल्लुक रखते हैं |उनका पुश्तैनी घर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में है| इलाका रामगढ़ ब्लॉक और गांव लवाली| महेंद्र के माता पिता उत्तराखंड से रांची शिफ्ट हो गए जहां इनके पिता पान सिंह बतौरजूनियर मैनेजर काम किया करते थे निकॉन में|धोनी की एक बहन है जयंती गुप्ता और भाई नरेंद्र सिंह धोनी|

बचपन से ही होनी को धोनी को एडम गिलक्रिस्ट, सचिन तेंदुलकर ,लता मंगेशकर और अमिताभ बच्चन बहुत पसंद थे |महेंद्र सिंह धोनी की शुरुआती पढ़ाई डीएवी जवाहर विद्या मंदिर शामिली में हुई| शुरू से ही स्पोर्ट्स की तरफ इनका काफी रुचि था| कभी यह बैडमिंटन खेलते तो कभी फुटबॉल और फुटबॉल में यह गोलकीपर थे और जानते नहीं थे क्रिकेट में आएंगे तो विकेटकीपर ही बनेंगे| इनकी गोल कीपिंग देखते हुए इन्हें लोकल क्रिकेट क्लब में बतौर क्रिकेटर चुन लिया हालांकि उन्होंने इन्होने कभी बल्ला चला नहीं था |गोलकीपर अच्छे थे तो विकेटकीपर भी बन गए ये क्लब था कमांडो क्रिकेट क्लब सन् 1995 से सन् 1998 तक ये क्लब से जुड़े रहे|

इन्होंने इतना अच्छा प्रदर्शन किया इन्हें वीनू मार्केट ट्रॉफी अंडर 16 चैंपियनशिप के लिए चुन लिया गया |वहां पर भी हुआ अच्छा प्रदर्शन किया बस यह अभी दसवीं कक्षा तक ही पहुंचे थे |इन्होंने ट्रेन टिकट एग्जामिनर का इंतिहान दिया और सिलेक्शन भी हो गया| धोनी उस वक्त जो भी कर रहे थे सब सटीक होता है और वैसे आज भी धोनी जो भी करते हैं वह सब सटीक ही होता है| सन् 2001 से लेकर सन् 2003 तक साउथ ईस्टर्न रेलवे मिन्दापूर बतौर रेलवे कर्मचारी काम करते रहे| इनके सहीकर्मी इन्हीं याद करते हैं तो कहते हैं ये बहुत ही नेक दिल और बहुत ही ईमानदार कर्मचारी थे |लेकिन शरारते भी यह कम नहीं किया करते थे | एक मर्तबा हुआ यू ये जब रेलवे क्वार्टर में रहा करते थे तब इन्होंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक शरारत की, किया क्या इन्होंने अपने ऊपर सफेद चादर लपेट ली और पूरी कॉलोनी में घूमते रहे चौकीदार तक डर गए और बाकी के लोगों को भी लगा कॉलोनी में भूत आ गए हैं|

धोनी बिहार अंडर-19 स्क्वायड में भी खेलें  और उसके बाद झारखंड के टीम के लिए भी |जिस मैच में धोनी का बल्ला चलता वह तय हो जाता वह टीम जरूर जीतेगी| बिहार क्रिकेट टीम के लिए खेलते हुए इन्होंने रणजी ट्रॉफी के लिए डेब्यू किया |सन् 2000 से 2003 मैं भी ये क्रिकेट खेलते रहे और रणजी ट्रॉफी का हिस्सा बने रहे| देवधर ट्रॉफी में भी अच्छा प्रदर्शन किया था और एक जबरदस्त सेंचुरी भी लगाई थी |

अब सवाल यह आता है महेंद्र सिंह धोनी इंडियन टीम तक कैसे पहुंचे?

बीसीसीआई की एक मुहिम है जहां पर छोटे शहरों से जबरदस्त टैलेंट खोज निकालने की कोशिश की जाती है तब प्रकाश पोद्दार जो कि सन् 1960 में बंगाल टीम के कैप्टन रह चुके थे उनकी नजर धोनी के हुनर पर पड़ी| बस देखने वाले ने देख लिया था और फिर तो धोनी के हुनर ने कमाल कर दिया| पहले इन्हें इंडिया A के लिए सिलेक्ट किया गया और इन्होंने इतनी अच्छी बैटिंग करी उस वक्त के कप्तान हमारे दादा रॉयल बंगाल टाइगर सौरव गांगुली की नजर इन पर पड़ी |उस वक्त रवि शास्त्री भी इनके हुनर का कायल हो चुके थे|

इंडियन टीम को जरूरत थी एक विकेट कीपर बेस्टमैन की कुछ ने कहा दिनेश कार्तिक को चुना जाए पर महेंद्र सिंह धोनी चुने गए सन् 2005 के  बांग्लादेश दौरे के लिए| शुरुआत में ही जीरो बन गए थे जी हां जीरो पर रन आउट हुए और कोई खाता भी नहीं खोल पाए| बांग्लादेश सीरीज बहुत ही खराब गई और जब पाकिस्तान सीरीज के लिए इन्हें चुना गया तो विशाखापट्टनम के मैदान में पे इन्होंने 123 गेंदों पर 148 रन बनाए और एक नया रिकॉर्ड भी कायम कर लिया था|जो हाईएस्ट स्कोर था किसी भी विकेट कीपर द्वारा| फिर वह मैच आया जिसमें धोनी को हुनर को और पुख्ता कर दिया जी वह मैच था जब सचिन तेंदुलकर जल्दी आउट हो गए थे| श्रीलंका ने 299 रन का टारगेट दिया था| जयपुर का सवाई मानसिंह स्टेडियम में भारत का इज्जत का सवाल आ गया था तो महेंद्र सिंह धोनी ने 185 गेंदें खेली और 183 रन बनाएं और यह मैच भारत जीत गया| उसके बाद तो सब इतिहास है फिर धीरे-धीरे उप कप्तान बने | फिर T20 टीम के लिए बतौर कप्तान चुना गया सन् 2007 में ऐसी कप्तानी की पहला T20 वर्ल्ड कप भारत के नाम हुआ|

इसके बाद सन् 2011 में वन डे इंटरनेशनल का वर्ल्ड कप भी भारत के नाम आए| महेंद्र सिंह धोनी एक के बाद एक इतिहास रचते जा रहे थे सुनील गावस्कर, कपिल देव, अजहरुद्दीन, सौरव गांगुली जैसे सफल कप्तानों के बाद अगर कोई ऐसा कप्तान मिला जिसने वाक्य ही पूर्व कप्तानों की भी कोई इज्जत बढ़ाई तो वह है महेंद्र सिंह धोनी|

महेंद्र सिंह धोनी का निजी जीवन

महेंद्र सिंह धोनी के निजी जीवन की बात करें तो इनका विवाह हुआ 4 जुलाई सन् 2010 को शादी हुई साक्षी से जो उत्तराखंड देहरादून के इलाके में रहने वाली है |जब इनकी शादी हुई थी तब वह अपना होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रही थी और फिर 6 फरवरी 2015 को इनके घर जीवा ने जन्म लिया जी हां इन दोनों की एक बेटी भी हुई|

क्रिकेट बाई चांस कहां जाता है यानी कि किस्मत का खेल लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने अपने हुनर से भारतीय क्रिकेट की नयी  किस्मत लिख डाली|