कई सालों के बाद भारत के दो बड़े समूह हिन्दू और मुस्लिम के हित में हो रहे क़ानूनी लड़ाई की सुनवाई हो चुकी है. 9 दिसम्बर 2019  को भारतवर्ष के सबसे प्रथम न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. फैसला के दौरान और फैसला आने के पहले एक दो दिनों पहले हीं सभी राज्य सरकारों को ये निर्देश दे दिया गया था की अपने अपने प्रान्त में किसी भी तरह के आराजकता न फैले इसका बंदोबस्त कर दिया जाये.

अयोध्या फैसला: सुप्रीम कोर्ट, राम मंदिर

 6 दिसंबर 1992  को जब बाबरी मस्जिद को तोड़ा गया था तभी से यह मामला काफी गर्म हो गया था. तब से लेकर  9 दिसंबर 2019 तक काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। 5 जजों की बेंच ने अयोध्या मामले पर सुनवाई करते हुए मुस्लिम पक्षों को 5 एकड़ जमीन  देने का ऐलान किया है. तथा हिंदू समाज को उसी स्थान पर जहां पर की राम जन्म भूमि बताई जा रही है ठीक उसी स्थान पर 2.5 एकड़ की जमीन दी गई है. जहां पर मंदिर का निर्माण शुरू होगा।

 कहा जा रहा है कि यह फैसला काफी सटीक और सही है यह सिर्फ एक या दो नहीं बल्कि देश के कई विद्वानों ने अपना तर्क तथा विचार प्रकट करते हुए इसकी जानकारी दे दी है. भारतवर्ष  लगभग सभी मुस्लिम समुदाय तथा हिंदू समुदाय इस फैसले से स्पष्ट रूप से संतुष्ट हैं. तथा इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं. वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में यह लगातार कहां है और कहते आ रहे हैं कि उन्हें इस फैसले से नाराजगी है उन्हें सुप्रीम कोर्ट  की जजमेंट से संतुष्टि नहीं हुई है.

 वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष की सभी ज्ञानी धर्मगुरु यह कह रहे हैं कि इस फैसले से हम संतुष्ट हैं. और इस फैसले को लेकर किसी भी तरह के कर्म ना उठाएं क्योंकि बिना सोच-विचार और तर्क के किसी फैसले पर पहुंचना सही नहीं होगा।

 फैसला आते ही भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट के जरिए यह कहा कि इसे  जीत की नजर से नहीं देखा जाए. बल्कि धर्म भक्ति के अलावा पहले देश भक्ति को प्रधानता दी जाए.  अभी पूरे भारतवर्ष में सभी स्थानों पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं ताकि किसी भी तरह का अराजकता ना फेल पाए.  वहीं दूसरी ओर साइबर पुलिस में सभी सोशल मीडिया और इंटरनेट पर खास रूप से नजर रख रही है कि कोई भी व्यक्ति किसी धर्म के प्रति गलत भावनाओं को बढ़ावा ना दे सके. 

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