शिमला में हल्द्वानी नाम के स्थान पर एक युवक ने अपनी जान दे दी। इस युवक का नाम देवी नाथ था। आज की ताजा खबर में आपको यह बताने जा रहा हूँ कि इस तरह की घटना देश के अलग अलग हिस्सों में लगातार होते ही जा रहे हैं।  युवक ने अपनी मौत के दो दिन पहले ही जहर खा लिया था, जिसके कारण उनकी मौत हो गई थी। और आस पास के अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया।

वास्तव में उसके मौत जे पीछे क्या कारण है

परंतु वहां पर उनकी इलाज ना होने के कारण परिवार बहुत ही तनाव में आ गया जिसके बाद उन्हें बाहर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिसके बाद वहां पर इलाज चलने के दौरान ही उस युवक ने दम तोड़ दिया पुलिस ने इसकी पोस्टमार्टम भी की उसके बाद इस युवक के मृतक शरीर को परिवार को सौंप दिया।

बहुत ही जांच पड़ताल के बाद यह बात सामने आई कि युवक बेरोजगारी से परेशान था। जिसकी वजह से वह बहुत ही ज्यादा तनाव में रहता था, उस युवक की तनाव इतनी तेजी से वृद्धि कर गई कि उन्हें अपनी जान गवानी पड़ी।

तनाव का क्या कारण था

यह सामने नहीं आ पाई है कि उसके तनाव के बढ़ने का कारण उसके परिवार मे उसके ऊपर दबाव था। या कुछ और ही था अगर यह बात सामने आती तो उनके परिवार पर भी कानून का हाथ पड़ जाता परंतु यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई है। कि उनके तनाव के पीछे क्या वास्तव में बेरोजगारी का तनाव ही था जिसकी वजह से उन्होंने अपने आप को समाप्त कर दिया।

देश के कई हिस्सों में ऐसे खबर आते रहते हैं जिसमें यह स्पष्ट रूप से यह वाक्य जरूर होता है कि उनके परिवार के दबाव या किसी अन्य व्यक्ति के दबाव के कारण किसी ने अपनी जान गवा दी परंतु यह खबर इससे बहुत ही ज्यादा अलग है। कि व्यक्ति ने अपने ही तनाव के कारण अपने को ही समाप्त कर दिया।

युवक या युवती के तनाव में परिवार के लोगों को क्या करना चाहिए

जब कोई भी युवक या युवती बेरोजगार हो तो उनके परिवार वालों को चाहिए कि उनका मार्गदर्शन करें और उसके साथ मानसिक तौर पर साथ रहे इससे उनका मन बहलाता रहेगा। और अपने आप को हल्का महसूस करेगा उसके बाद वह ना सिर्फ किसी अन्य व्यक्ति पर अपनी बेरोजगारी को दूर करने के लिए निर्भर रहेगा बल्कि वह खुद कुछ ऐसे साधनों को बना देगा जिसके चलते वह पैसे कमा सकें।
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देश में विद्यार्थी जो कि युवक या युवती हो सकते हैं जो कि किसी भी स्तर की पढ़ाई कर रहे हो सकते हैं। जिसके ऊपर अक्सर तनाव देखा गया है उस तनाव को कम करने की जिम्मेदारी उसके माता-पिता या उसके गार्जियन को ध्यान देना चाहिए ना कि उन्हें अकेला छोड़ दें कि तुम्हें जैसा किया है। वैसा ही मिलेगा या किसी तरह का अतिरिक्त वाक्य उस पर सौंप दें।

इस तरह की खबरों से हम सभी को निश्चित तौर पर कुछ ना कुछ जरूर सीखना चाहिए। जिसके चलते समाज में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके क्योंकि यह सभी घटनाएं बहुत ही ज्यादा दुखदाई होती है इससे किसी का परिवार भी उजड़ सकता है। फेसबुक इंस्टाग्राम, यूट्यूब या ट्वीटर पर सबसे पहले खबरों को जानने के लिए जुड़ सकते है.

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