भारत की राजधानी नई दिल्ली में सबसे ऊंचा कचरे का ढेर जमा हो चुका है जो कि अगले साल यानि 2020 तक ताजमहल से भी ऊंचा हो जाएगा। यह इतना बड़ा ढेर हो जाएगा कि यह 73 मीटर की ऊंचाई को भी पार कर लेगा जोकि ताजमहल की ऊंचाई से भी ज्यादा होगी। वजह ये है कि वहां पर करीब 2 टन हर रोज कचरा जमा होता है।

दिल्ली का कचरे का ढेर
दिल्ली का कचरे का ढेर

हाईलाइट:

  • 2 टन हर रोज जमा होता है नया कचरा।
  • 2002 में हीं पूरा हो चुका था कचरा रखने का क्षमता।
  • 63 मीटर यानी 213 फीट ऊंचा है यह कचरे का ढेर।
  • यहां पर सालाना करीब 6 करोड़ 20 टन होता है कचरा जमा।
दरअसल यह दिल्ली के पूर्वी इलाका गाजीपुर का है, जहां पर 2013 से 2017 में किये गए सर्वे के मुताबिक करीब 981 लोगों की मौत इसी कचरे के इंफेक्शन की वजह से हुई है। यहां पर करीब करीब 10 लाख से भी ज्यादा लोग इसी कचरे के इंफेक्शन में जी रहे है।
पर्यावरण समूह की चिंतन की प्रमुख चित्रा बनर्जी ने कहा कि इस कचरे का समाधान जल्द से जल्द ढूंढना होगा। चित्रा बनर्जी ने कहा कि इस कचरे के चलते जो भी वायु में प्रदूषण हो रहे हैं उसके वजह से लोग अधिक बीमार हो रहे है। बीमारी तक तो ठीक है परंतु दवाई खाने या इलाज के बाद रोगी ठीक हो जाने चाहिए थे लेकिन लोग लंबे समय तक बीमार पड़े रह रहे हैं।

दिल्ली के कचरे के ढेर को कब बनाया गया था?

दिल्ली के गाजीपुर का कचरा संग्रह वर्ष 1984 को बनाया गया था। सुरुआत में यहां पर ऐसा कोई संभावना नही था कि यहां पर कचरे का स्थान जल्दी भर जाएगा। परन्तु कचरे का भराव इतनी तेजी से होने लगा कि वर्ष 2002 में ही इसके क्षमता से भी ज्यादा कचरा भरा जा चुका था।
2018 में बारिश के कारण इस कचरे के ढेर के ढह जाने से 2 लोगो की मौत सामने आई थी, जिसके कारण दिल्ली की सरकार ने यह निर्णय लिया कि यहां पर अब कचरा नही डाला जाएगा। कचरा डालने का और कोई उपाय ना मिलने पर फिर से यहां पर फिर से अबतक कचरा डाला जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश:

बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने भी यह चेतावनी देते हुए कहा था कि इस कचरे के ढेर पर रेड लाइट लगानी पड़ेगी ताकि सभी तरह के वायुयान सुरक्षित रह सके। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट के सीनियर रिसर्चर शाम्भवी शुक्ला ने कहा कि इससे उत्पन्न होने वाली मीथेन गैस वायु में मिलकर वायु को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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