Function of Blood: हम इंसानों की यह हमारा ब्लड यानी खून किसी वरदान से कम नहीं है इसके होने से ही हम सभी जीवित रह पाते हैं ह्यूमन सर्कुलेटरी सिस्टम और Function of Blood का अस्तित्व इसके बिना कुछ भी नहीं है हम इसे Function of Blood के माध्यम से जानेंगें शरीर के सभी ऑर्गन यानी अंगों और इंद्रियों तक ठीक मात्रा में ऑक्सीजन और न्यूट्रींस को पहुंचाने के साथ ही यह कई प्रकार के इंफेक्शन से भी लड़ता है।

function of blood खून की कार्यप्रणाली
Blood Groups

और Blood वोकल्स के खराब हो जाने पर ब्लड क्लॉटिंग जैसी प्रक्रिया को भी अंजाम देता है जिससे हमारे शरीर में खून की कमी ना हो पाए।

Blood के बिना तो हम हमारे जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते उनकी वजह से मेडिसिंस जैसे की एंटीबायोटिक्स का असर हमारे शरीर पर होता है और इसके टेस्ट यानी ब्लड टेस्ट के आधार पर ही डॉक्टर हमारे शरीर में मौजूद बीमारी और कई तरह के मिनरल्स की मात्रा का पता लगा पाते हैं।

हम यह तो जानते ही हैं कि जब कभी किसी व्यक्ति को Blood की कमी होती है तो उसे उसी के Blood Type का Blood चढ़ाया जाता है जिसे ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी कहा जाता है पर दोस्तों जरा सोचिए अगर किसी इंसान को गलती से गलत खून चढ़ा दिया जाए तो ऐसी कंडीशन में उसके साथ क्या हो सकता है आखिर क्या हो सकते हैं इसके दुष्परिणाम चलिए बात करते हैं और समझते हैं अलग-अलग Blood Types को मिक्स करने के पीछे का विज्ञान:

हमारा खून बेसिकली चार कम्पोनेंट से मिलकर बना होता है: Function of Blood

 Plasma: ये हमारे खून का लिक्विड भाग होता है और लगभग खून का 55% हिस्सा इसी से बना होता है ये प्लाज्मा देखने में पीले रंग का होता है जिसमे 90 % तक पानी, नमक, तरल तथा हार्मोंस और कुछ जरुरी प्रोटीन मौजूद होता है येे प्लाज्मा प्रोटीन और जरूरी न्यूट्रिएंट्स पहुंचाता है और अक्सर खून में पानी की कमी को इसी प्लाज्मा के द्वारा पता लगाते हैं।

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Blood Groups

Red Blood cells: हमारे खून का लगभग 40% से 45% हिस्सा इन्ही ब्लड सेल्स से मिलकर बना होता है सामान्यतः इंसानी खून का 1 बून्द में लगभग 5 मिलियन रेड ब्लड सेल होता है इन रेड ब्लड का 90 % हिस्सा हिमोग्लोबीन नाम के पदार्थ से बना होता है जिसकी वजह से ही हमारे खून का रंग लाल होता है और ऑक्सीज़न का प्रवाह भी इन्ही रेड ब्लड सेल की वजह से होता है दोस्तों खास बात यह है की ये ब्लड सेल लगातार बनते रहते है और हर एक सेकंड हमारे शरीर में 2-3 मिलियन रेड सेल बनते ही रहते है और इनकी उम्र लगभग 120 दिनों तक की हो सकती है।

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    White blood cells: दोस्तों इन ब्लड सेल के बारे में तो जरूर पढ़ा होगा ये ब्लड का लगभग खून का 1% हिस्सा लेता है कहने में तो ये मात्रा बहुत कम लगती है लेकिन इस ब्लड सेल का महत्व काफी ज्यादा है क्योंकि हमारे खून ब्लड सेल का इम्यून सिस्टम इन्ही वाइट ब्लड सेल पर निर्भर करता है।
    वैसे तो इन वाइट ब्लड सेल के और भी प्रकार होते है इनका काम हमारे खून में से बैक्ट्रिया या किसी भी तरह के वायरस को पहचानना या हटाना होता है जिससे हमारा immune system सही तरीके से काम कर सके और हमारा स्वाथ्य भी ठीक रहे।

    Platelets: दोस्तों ये प्लैटलेट्स हमरे ब्लड का काफी अलग हिस्सा होता है जिसका साइज रेड ब्लड सेल्स और सफ़ेद ब्लड सेल्स से छोटा होता है इन ब्लड सेल का मेन फंक्शन जमने और एकत्रतित करना होता है जो चोटो और जख्मो को ठीक करने में काफी मदद करता है बाकि ब्लड सेल की तरह ये भी लगातार बनते रहते है और इनका उम्र लगभग 10 दिन तक का होता है।

    दोस्तों ये तो बात हुए हमारे खून के बहुत जरुरी हिस्सों की जोकि जानना काफी जरूरी भी होता है क्योंकि इन ब्लड सेल का अपना अपना Function of Blood होता है

    तो चलिए अब बात कर लेते है कि सभी इंसान का ब्लड सेल काफी अलग क्यों होता है और यह भी जानते है की अगर किसी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति में कोई दूसरा ब्लड ग्रुप वाला ब्लड डालते है तो क्या होगा?

    दोस्तों आप ये तो जानते ही होंगे की हमारे ब्लड का प्रकार A+, B+, या O+ या etc. बताया जाता है आखिर किस आधार पर हमें ये खून के अलग अलग प्रकार मिलते है तो चलिए जानते है :

    दोस्तों आप को तो पता ही होगा की हमारे रेड ब्लड सेल में कई तरह के प्रोटीन मौजूद होता है जिसमे एक खास प्रकार का प्रोटीन आता है जिन्हे कहते है एंटीजन जो रेड ब्लड सेल के सतह पर या बाहरी परत पर मौजूद होते है।

    जो सफ़ेद ब्लड सेल से कम्यूनिकेट करता है जिससे वो इन्फेक्शन को पकड़ पाते है इसके साथ ही ये एंटीजन अपने ही ब्लड सेल को पहचानने में मदद करता है दोस्तों ये एंटीजन प्रमुख रूप से दो प्रकार के होते है एंटीजन A और एंटीजन B जो हमरे ब्लड निर्धारित करते है यानि अगर आपके खून में टाइप A एंटीजन है तो आपका ब्लड ग्रुप होगा A और अगर आपके ब्लड के एंटीजन का टाइप B है तो आपका ब्लड टाइप होगा B.

    function of blood खून की कार्यप्रणाली
    blood cells

    जब भी अलग तरह का एंटीजन वाला ब्लड हमारे ब्लड में प्रवेश करता है तो प्लाज्मा में मौजूद एंटी बॉडी को सक्रिय कर देता है जिससे ब्लड सेल गुच्छों में बदल जाता है जिससे ब्लड वेहिकल्स में रूकावट आ जाती है जिससे ब्लड सर्क्युलेशन में गर्बरी होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है।

    दोस्तों एक बात पर एक ध्यान जरूर देना चाइये की ये एंटीजन ये अलग प्रकार के एंटी बॉडी को सक्रिय करता है और उन्हें रोकने का प्रयास करते है अपने ही टाइप के ये antigen को accept कर लेते है।

    Function of Blood के बारे में आप पढ़ रहे हैं
    अगर आपके ब्लड में टाइप A एंटीजन है तो ये टाइप B को रोकने के लिए एंटीबाडी एक्टिव करेगा और अगर आपके ब्लड में टाइप B एंटीजन है तो ये टाइप A को रोकने के लिए एंटीबाडी एक्टिव करेगा अगर आपके ब्लड में दोनों तरह के एंटीजन है तो आपके ब्लड टाइप होगा अब और एंटीबाडी सक्रिय ही नहीं होगा यानि आपके ब्लड सेल दोनों ही श्तिति में दूसरे ब्लड सेल को एक्सेप्ट कर लेगा।

    अगर किसी भी लोगो में दोनों ही तरह के एंटीजन नहीं हो तो उनके जीन्स एक खास तरह के एग्लूटोजेन्स से कोड किये जाते है जिसे ब्लड टाइप O कहा जाता है और ये एंटीजन A और एंटीजन B दोनों ही तरह के ब्लड सेल को रोकने के लिए एंटीबाडी सक्रीय करेगी और इन ब्लड सेल को रोकने का पूरा प्रयास करेगी।

    दोस्तों पूरी दुनिया में लगभग 35 प्रकार की ब्लड ग्रुप्स है जिनमे में रुप से 2 ग्रुप ही हम इंसानों में पाये जाते है ABO और Rh ग्रुप पाये जाते है जब आबो ब्लड ग्रुप सिस्टम रह ब्लड ग्रुप सिस्टम से मिलते है तो हमें 8 अलग प्रकार के ब्लड ग्रुप प्राप्त होता है।

    Function of Blood में निम्नलिखित blood group है:

    • A+ (positive)
    • B+ (positive )
    • AB+ (positive)
    • O+ (positive)
    • A- (negative)
    • B- (negative)
    • AB- (negative)
    • O- (negative)

    दोस्तों ये पॉजिटिव और नेगेटिव sign को भी एक बार समझ लेते है इस Rh ग्रुप सिस्टम में लगभग 49 एंटीजन होते है जो ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम को पॉजिटिव और नेगेटिव sign देते है पॉजिटिव ब्लड ग्रुप का मतलब ये है की रह ग्रुप के सभी एंटीजन मौजूद होते है और नेगेटिव का मतलब ये है कि उस ब्लड ग्रुप में रह के 49 एंटीजन मौजूद नहीं है।

    function of blood खून की कार्यप्रणाली
    Dameged Blood cells

    अब बात करते है खून चढ़ाने की तो ये बहुत ही सावधानी से किया जाता है क्योंकि ब्लड की सही से जांच करना और उसे सही से दूसरे इंसांन में चढाना काफी सवेदनशील होता है।

    अगर किसी व्यक्ति में दूसरे ब्लड ग्रुप के ब्लड को चढ़ा दिया जाये तो यह जानलेवा साबित हो सकता है आमतौर पर किसी व्यक्ति में सही खून चढ़ाने पर अलर्गी भी हो सकता है लेकिन एंटीबायोटिक की मदद से डॉक्टर इसे कंट्रोल कर लेता है।

    अगर अलग तरह के एंटीजन वैले ग्रुप को डाल दे तो यह जिंदगी और मौत की स्थिति हो जाती है जैसा की पहले बताया गया कि अलग तरह के एंटीजन जब ब्लड में आते है तो एक रिएक्शन शुरू होता है और सभी एकत्रित हो कर ब्लड वोकल्स को ब्लॉक कर देते है जिससे ब्लॉड का सर्कुलेशन भी रूक सकता है।

    और उसके साथ ही हीमोग्लोबिन प्लाज्मा में गिरने लगता है जो पेशाब के माध्यम से गहरे ब्राउन रंग होकर बाहर निकलने लगता है और हीमोग्लोबिन भी बिलीरुबिन नाम के एक सब्सटांस में बदलने लगता है जिससे लोगो में पीलिया एक जोंडिस होने का बहुत डर रहता है।

    दोस्तों इस पीलिया रोगों से तो लड़ा जा सकता है लेकिन जब अगर दूसरे ब्लड ग्रुप वाले ब्लड की मात्रा बहुत अधिक हो तो मौत निश्चित हो जाता है क्योंकि ब्लड में कई खास तरह के चैन रिएक्शन स्टार्ट हो जाता है।

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