जनवरी 21, 2020

मदरसों में नहीं, स्कूलों में बन रहे हैं इस्लामी कट्टरपंथी

कई देशों और हिंदुस्तान में आतंकवादी हमले होने के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि अधिकतर मुसलमान ही आतंकवादी पाए गए हैं, यानी कहीं ना कहीं कोई मुस्लिम संस्था होती है जो आतंकवाद को बढ़ावा देती है। लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में यह बिल्कुल ही उल्टा नजर आता है आप इस पोस्ट को अंत तक पड़ेगा पढ़ने के बाद शेयर जरूर कर दीजिएगा.

बांग्लादेश के एक रिपोर्ट के मुताबिक आतंकवादी कौन है?

मद्रासी में नहीं, स्कूलों में बन रहे हैं इस्लामी कट्टरपंथी
फ़ोटो: समाचार Book

बांग्लादेश में एक खुफिया एजेंसी ने 2015 से 2017 के बीच पकड़े गए अपराधियों का विश्लेषण किया, तो उन्हें पता चला कि वह सभी किसी मदरसे में नहीं बल्कि स्कूलों में पढ़े हैं. मोहम्मद मोनिरुजमान जो खुफिया एजेंसी के चीफ इंस्पेक्टर हैं ने बातचीत में कहा कि यह सभी लोगों की सामान्य मानसिकता है।

मदरसे में पढ़ने वाला छात्र आतंकवादी को बढ़ावा देती है, या मदरसा में दी जाने वाली शिक्षा आतंकवाद को बढ़ावा देती है परंतु यह गलत है उनके अनुसार यह कहा गया कि सिर्फ और सिर्फ मदरसा में दी जाने वाली शिक्षा ही जिम्मेदार नहीं है, और यह कहना गलत भी है कि सिर्फ मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा आतंकवाद को बढ़ावा देती है.

बांग्लादेश में कितने तरह के स्कूल हैं?

भारत की तरह बांग्लादेश में भी 3 तरह के स्कूल हैं, पहला स्कूल जो कि सरकारी स्कूल है जो कि वहां की गवर्नमेंट द्वारा चलाई जाती है यहां की स्कूल में सभी धर्मों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए शिक्षा दी जाती है, दूसरा स्कूल है जिसमें कि सिर्फ इस्लामी शिक्षा के बारे में बताई जाती है यानी यह मदरसा है और तीसरे प्रकार का स्कूल जिसने इंग्लिश मीडियम की शिक्षा दी जाती है इसे प्राइवेट स्कूल कहा जाता है।

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बांग्लादेश के खुफिया जांच के बाद यह रिपोर्ट जारी किया गया है कि स्कूलों में लगभब 50% पढ़े हुए विद्यार्थी आतंकवादी भावना के थे, परंतु यही आंकड़े अन्य स्कूल व्यवस्था में पढ़े हुए विद्यार्थियों में कम पाई गई. फिलहाल यह खबर फेसबुकइंस्टाग्रामयूट्यूब या ट्वीटर पर चर्चे में नही है।

ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शातुन उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक स्कूलों में नजर रखना बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इससे मानसिकता बिगड़ सकती है, और सभी सिस्टम में तनाव आ सकता है उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के स्कूली व्यवस्था में सवाल उठाना सही नहीं है।

बांग्लादेश में अधिकतर कौन लोग आतंकवादी भावना के होते हैं?

बांग्लादेश ने हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों में एक बात रिपोर्ट के जरिए कॉमन कर दी है, कि उसने से लगभग 80% आरोपी इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे और इस खुफिया एजेंसी का और कुछ संस्थानों का यह भी मानना है, कि जो इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उन्हें कट्टरपंथी भावना अधिकतर बाई गई है और वह भावना लगातार बढ़ती भी रहती है जो किसी को नुकसान भी दे सकती है।

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वहीं कुछ सर्वे यह भी स्पष्ट कर रही है कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले कोई भी व्यक्ति कट्टरपंथी भावना का शिकार नहीं होते हैं, बल्कि उनमें जागरूकता आती है कि सच्चाई क्या है और झूठ क्या है, यानी कि बांग्लादेश के सर्वे को इस दुनिया के कुछ महान सर्वे या ऐसे कहें जो कि अत्यधिक देशों में सर्वे किए गए हैं वह बांग्लादेश के सर्वे को झूठ बता देते हैं।

आप अपना निष्कर्ष दें?

आप सभी में पढ़ने वाले सभी तरह के धर्म से रहने वाले हैं तो मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हूं कि आप नीचे कमेंट जरूर करके बताइए कि आखिरकार सच्चाई क्या है कि लोग शांति से रहना चाहते हैं या फिर इस तरह की कट्टरपंथियों को बढ़ावा देने के लिए अजीब अजीब तरह की हरकतें करते रहते हैं।

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